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Sanskrit Mantras · Hindi Meaning

संस्कृत मंत्र — अर्थ और महत्व

Sanskrit Mantras with Full Meaning in Hindi

यहाँ भारत के सबसे महत्वपूर्ण संस्कृत मंत्रों का पूर्ण अर्थ, शब्द-दर-शब्द विश्लेषण और जप विधि दी गई है। मंत्र केवल जपने के लिए नहीं हैं — उनका अर्थ जानने से उनकी शक्ति कई गुना बढ़ जाती है।

20 मिनट पढ़ने का समय · पाँच प्रमुख मंत्र

मंत्र क्या हैं? मंत्र संस्कृत शब्द है — मनन (जो मन को मुक्त करे) + त्रायते (रक्षा करे) = मंत्र। ये ध्वनि-संयोजन हैं जो बार-बार दोहराने पर मन को एकाग्र करते हैं और चेतना को उच्च स्तर पर ले जाते हैं।

गायत्री मंत्र

Gāyatrī Mantra · ऋग्वेद ३.६२.१०

1

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥

oṃ bhūr bhuvaḥ svaḥ tat savitur vareṇyaṃ bhargo devasya dhīmahi dhiyo yo naḥ pracodayāt

हिंदी अर्थ

हम उस परम तेजस्वी, पूजनीय, दिव्य सूर्य देव के प्रकाश का ध्यान करते हैं। वे हमारी बुद्धि को प्रेरित और प्रकाशित करें।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

ॐ (Om)परब्रह्म का प्रतीक — सम्पूर्ण सृष्टि की मूल ध्वनि
भूः (Bhūḥ)भौतिक लोक — पृथ्वी
भुवः (Bhuvaḥ)मध्य लोक — अंतरिक्ष
स्वः (Svaḥ)दिव्य लोक — स्वर्ग
तत् (Tat)वह (परम सत्ता)
सवितुः (Savitur)सूर्य का, दिव्य प्रकाशक का
वरेण्यम् (Vareṇyam)सर्वश्रेष्ठ, आराधनीय
भर्गः (Bhargaḥ)तेज, आत्मिक प्रकाश, पापों को जलाने वाला
देवस्य (Devasya)दिव्य का, देव का
धीमहि (Dhīmahi)हम ध्यान करते हैं
धियः (Dhiyaḥ)बुद्धि, विवेक
यः (Yaḥ)जो
नः (Naḥ)हमारी
प्रचोदयात् (Pracodayāt)प्रेरित करे, प्रकाशित करे

महत्व

गायत्री मंत्र को वेदों का सार माना जाता है। यह प्रतिदिन प्रातःकाल, मध्याह्न और सायंकाल तीन संध्याओं में जप किया जाता है। इसे "वेद माता" भी कहते हैं।

जप विधि

प्रतिदिन 108 बार या कम से कम 11 बार। सूर्योदय के समय पूर्व दिशा में बैठकर।

महामृत्युंजय मंत्र

Mahāmṛtyuñjaya Mantra · ऋग्वेद ७.५९.१२ / यजुर्वेद ३.६०

2

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

oṃ tryambakaṃ yajāmahe sugandhiṃ puṣṭi-vardhanam urvārukam iva bandhanān mṛtyor mukṣīya māmṛtāt

हिंदी अर्थ

हम तीन नेत्रों वाले (भगवान शिव) की पूजा करते हैं जो सुगंधित हैं और पोषण बढ़ाने वाले हैं। जिस प्रकार खीरा अपनी लता से स्वाभाविक रूप से अलग हो जाता है, वैसे ही हम मृत्यु के बंधन से मुक्त हों — अमृत से नहीं।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

त्र्यम्बकम् (Tryambakam)तीन नेत्रों वाले — भगवान शिव (तृतीय नेत्र = ज्ञान)
यजामहे (Yajāmahe)हम पूजा करते हैं, यजन करते हैं
सुगन्धिम् (Sugandhim)सुगंधित, दिव्य सुगंध से युक्त
पुष्टिवर्धनम् (Puṣṭi-vardhanam)पोषण और समृद्धि बढ़ाने वाले
उर्वारुकम् इव (Urvārukam iva)खीरे की तरह (जो पकने पर स्वाभाविक रूप से लता से अलग हो जाता है)
बन्धनात् (Bandhanāt)बंधन से, मृत्यु के चक्र से
मृत्योः (Mṛtyoḥ)मृत्यु से
मुक्षीय (Mukṣīya)मुक्त करें, मोक्ष दें
मा अमृतात् (Mā amṛtāt)अमृत (मोक्ष) से नहीं — अर्थात् मोक्ष को बनाए रखते हुए

महत्व

इसे "मृत्युंजय मंत्र" या "रुद्र मंत्र" भी कहते हैं। गंभीर बीमारी, भय और मृत्यु के भय को दूर करने के लिए इसका जप किया जाता है। इसे शिव का सबसे शक्तिशाली मंत्र माना जाता है।

जप विधि

108 बार, विशेषतः शिवरात्रि और प्रदोष पर। बीमारी या कठिनाई में 1,008 बार।

ॐ नमः शिवाय

Oṃ Namaḥ Śivāya · कृष्ण यजुर्वेद — श्री रुद्रम्

3

ॐ नमः शिवाय

oṃ namaḥ śivāya

हिंदी अर्थ

मैं भगवान शिव को नमस्कार करता हूं — जो शुभ हैं, जो मंगलकारी हैं।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

ॐ (Om)परब्रह्म — समस्त सृष्टि की आदि ध्वनि
नमः (Namaḥ)नमस्कार, प्रणाम, समर्पण
शिवाय (Śivāya)शिव को — "शिव" का अर्थ है: शुभ, मंगलकारी, कल्याणकारी

महत्व

पंचाक्षर मंत्र — पाँच अक्षर (न, मः, शि, वा, य) पाँच तत्वों के प्रतीक हैं: न = पृथ्वी, मः = जल, शि = अग्नि, वा = वायु, य = आकाश। यह शैव सम्प्रदाय का मूल मंत्र है।

जप विधि

किसी भी समय, किसी भी संख्या में। विशेषतः सोमवार और शिवरात्रि को।

ॐ नमो नारायणाय

Oṃ Namo Nārāyaṇāya · तैत्तिरीय आरण्यक / नारायण सूक्त

4

ॐ नमो नारायणाय

oṃ namo nārāyaṇāya

हिंदी अर्थ

भगवान नारायण (विष्णु) को मेरा प्रणाम। जो सभी जीवों के आश्रय हैं, जो सर्वत्र व्याप्त हैं।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

नमः (Namaḥ)प्रणाम, समर्पण
नारायणाय (Nārāyaṇāya)नारायण को — नार = जल/मनुष्य + अयन = निवास; "जो सब में निवास करते हैं"

महत्व

अष्टाक्षर मंत्र — वैष्णव परम्परा का सबसे पवित्र मंत्र। भगवान विष्णु के सभी अवतारों की उपासना इसमें समाहित है।

जप विधि

108 बार। एकादशी और विष्णु के उत्सवों पर विशेष महत्व।

सरस्वती वंदना

Sarasvatī Vandanā · सरस्वती स्तोत्र

5

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥

yā kundendutusārahāradhavalā yā śubhravastrāvṛtā yā vīṇāvaradaṇḍamaṇḍitakarā yā śvetapadmāsanā yā brahmācyutaśaṃkaraprabhṛtibhir devaiḥ sadā vanditā sā māṃ pātu sarasvatī bhagavatī niḥśeṣajāḍyāpahā

हिंदी अर्थ

जो कुंद, चंद्र और हिम के हार जितनी श्वेत हैं, जो शुभ्र वस्त्र धारण करती हैं; जिनके हाथ वीणा और वरद मुद्रा से सुशोभित हैं और जो श्वेत कमल पर विराजमान हैं; जिनकी ब्रह्मा, विष्णु और शिव सदा वंदना करते हैं — वे भगवती सरस्वती हमारी रक्षा करें और हमारी सम्पूर्ण जड़ता को दूर करें।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

कुन्देन्दु (Kundeindu)कुंद (चमेली) + इंदु (चंद्रमा) — उतनी सफेद
वीणा (Vīṇā)सरस्वती का वाद्य — संगीत और ज्ञान का प्रतीक
जाड्यापहा (Jāḍyāpahā)जड़ता को दूर करने वाली — अज्ञान, आलस्य और बुद्धिहीनता की नाशक

महत्व

विद्यारंभ, परीक्षा और कला सीखने से पहले इस मंत्र का पाठ किया जाता है। वसंत पंचमी पर विशेष।

जप विधि

प्रतिदिन पढ़ाई शुरू करने से पहले। वसंत पंचमी पर 108 बार।

मंत्र जप के नियम

1.

शुद्ध उच्चारण — गलत उच्चारण से अर्थ बदल जाता है। पहले सुनें, फिर जपें।

2.

माला का उपयोग — 108 मोतियों की माला। प्रत्येक मोती = एक जप।

3.

स्थिर आसन — पद्मासन या सुखासन में बैठकर, रीढ़ सीधी।

4.

नियमितता — प्रतिदिन एक ही समय पर। अनियमित जप से शक्ति कम होती है।

5.

अर्थ जानकर जपें — अर्थ समझकर किया गया जप अधिक प्रभावी होता है।

6.

मौन — जप के बाद कुछ क्षण मौन में बैठें।

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